Saturday, 30 August 2014

वह पेड़

वह पेड़ मोड़ पर खड़ा रहता था,
आते-जाते, हर राही को तांकता था,
पर कभी कुछ न किसी से कहता था |

वर्षा-धूप से बचाया, उसने जाने कितनों को,
ना कभी जाति पूछी किसी की उसने,
ना कभी रंग-भेद से किसी को छाया दी |

कई लोग हंसकर देखते थे उसकी ओर,
जो कोई ज़ोर से हथेली मारकर अपनी उलझन बताता,
ऋषि-मुनि की भाँती, वह पेड़ सभी को अपनाता |

एक दिन रोज़ की तरह, मैं मोड़ पर पहुंचा,
गर्मी के प्रचंड शोले बदन को जला रहे थे,
उस दिन मुझे बचाने वह पेड़ वहाँ नहीं था |

थोड़ी दूर पर ही दूसरा पेड़ मुझे दिख गया,
मैं जाकर उसकी शीतल छाँव में खड़ा हो गया,
गर्मी से आराम मिला, और मैं खुश हो गया |

मैं खड़ा ही था कि मुझे सिसकियाँ सुनाई दी,
वह पेड़ रो रहा था, फिर भी निरंतर छाया दे रहा था,
आंसू उसके अपने लिए नहीं, हमारे लिए ही थे |

उस पेड़ ने मुझे बताया कि कल मुझे भी काट दिया जाएगा,
दुःख अपना नहीं है, मगर तुम्हें छाया कौन देगा ?
कौन रोकेगा सूखे को ? बढ़ती हुई इस गर्मी को ?
कौन वर्षा कराएगा? कौन फल-फूल देगा तुम्हें ?
तुम तो अपना वंश बढ़ा रहे हो मानव, मगर,
हमें निर्वंश क्यों मार रहे हो ?

सुन कर मेरा दिल पसीज गया,
मगर करूँ क्या? किसे समझाऊं? और कैसे ?
सभी अपनी धुन में मग्न हैं, अपनी ही दौड़ में ब्यस्त हैं,
ये मुझे अकेले को ही नहीं, सभी को सोचना होगा,
जो-जो इस भू-मंडल पर है, अब सभी को प्रण लेना होगा,
ये श्रृष्टि हमें बचानी है, ये धरती नयी बनानी है |

Friday, 20 June 2014


                     छंद मेरे तेरे लिये

             तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
             नैनों को जो है भाती, वो सूरत जो तेरी है |
             जपती हैं सांसें अब दिन-रात माला तेरी,
             मन में जो मुस्काई, मूरत जो तेरी है |
             तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
             नैनो को जो है भाती, सूरत जो तेरी है |

ह्रदय में उमड़ती है, उमंग तेरे प्रेम की जो,
छेड़ती तराना है, ये कहती तरंग है |
तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
नैनों को जो है भाती, सूरत जो तेरी है |

             चलता हूँ राह में जो, तू है मेरे साथ-साथ,
             चलती है मेरे तू, डाले हाथों में हाथ है,
             न्रित्यांग्नी है ये शराब, या झूमता है पीने-वाला
             खबर किसी को नहीं है, कि किसमे क्या बात है
             ज़िन्दगी की राह में जो, मिल जाय तू अगर
             मेरी लिए यही श्रावण – यही बरसात है
             तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
             नैनों को जो है भाती, सूरत जो तेरी है |

कंठ मेरा-गीत तेरे, रूप तेरा-साया मेरा,
ह्रदय में धड़कती है, धड़कन तेरी सांस है
कह दूँ, कहेगा ये ज़माना एक दिन ये भी,
कर जाऊं कुछ ऐसा, ये भी इतिहास है
तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
नैनों को जो है भाती, सूरत जो तेरी है |

             गहराई देखो, इस सागर में समाई है जो,
             इसको तो रोकती, इक छोर से पाताल है |
             मन में उमड़ता है, प्रेम कितना गहरा है,
             इसकी गहराई का ना अम्बर ना पाताल है ||
             तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,
             नैनों को जो है भाती, सूरत जो तेरी है |

     

Friday, 6 June 2014

ऐ शीतल पवन

                                ऐ शीतल पवन
ऐ शीतल पवन, ले चल मुझे,
हमें तुमसे प्यार है, पुकारे कोई |
उमंग मनचली, क्यों बहका रही,
            धड़कन मेरी अब यही गा रही |
ऐ शीतल पवन, ले चल मुझे,
हमें तुमसे प्यार है, पुकारे कोई ||


तू छाया मेरी, मेरे साथ चल,
जिंदगानी अधूरी, इसे पूरी कर |
देखूं मैं अब जहां, आये तू ही नज़र,
हो रहा है यह क्या, मुझपे इश्क-ऐ-असर |
ऐ शीतल पवन, ले चल मुझे,
हमें तुमसे प्यार है, पुकारे कोई ||


लहलहाती धरा, चलती शीतल पवन,
रिश्ता ऐसे कोई, जैसे योगी-हवन |
आ रहा हूँ मैं, गा रहा हूँ अब,
तुझको ले जाऊँगा, कह रहा है ये मन |
ऐ शीतल पवन, ले चल मुझे,
हमें तुमसे प्यार है, पुकारे कोई ||



साथ जो तू मेरे, तो साथ दुनियाँ चले,
डरना क्यों फिर हमें, जो साथ प्यार चले |
हाथों में अब मेरे, हाथ तेरा रहे,
हँसते-गाते हुए,सफ़र यूं ही चले |
ऐ शीतल पवन, ले चल मुझे,
हमें तुमसे प्यार है, पुकारे कोई ||

Saturday, 31 May 2014

कभी कोई-कभी कोई

कभी कोई-कभी कोई, दिल में तब, अब कोई,
कोई बैरन हवा थी वो, गई जगा उमंग सोई |
कभी इस पर, कभी उस पर, मचल जाता है ये यूँ ही,
दिल बगिया है बहारों का, इसमें कभी कोई-कभी कोई ||



घटायें पर्वतों की अब, उठती हैं, मेरे मन से,
झरने फूटते हैं, चाहतों के अब, मेरे मन से |
कोई पागल न कर दे अब, कहता हूँ अब तुमसे,
मेरी राहें ही हैं तुझ तक, यही मानूं मैं अब दिल से ||   

दिखें चेहरे अंखियों से, लगे अपना हर कोई,
कभी कोई-कभी कोई, दिल में तब, अब कोई ||